होसे मानुएल अल्मुसारा ने गाउदी की मृत्यु की शताब्दी को समर्पित «गाउदी वर्ष» के अंतर्गत El Círcol de Reus में आंतोनी गाउदी और प्रकृति के संबंध पर व्याख्यान दिया। कातालान भाषा की ईसाई समाचार एजेंसी Agència Flama ने 20 जनवरी 2026 को इसकी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका शीर्षक व्याख्यान के मूल तर्क को समेटता है: गाउदी प्रकृति की नकल नहीं करते थे, वे उसके नियम खोज निकालते थे।
«Gaudí i la natura» (गाउदी और प्रकृति) नामक यह व्याख्यान «गाउदी वर्ष» (Any Gaudí) के कार्यक्रमों का हिस्सा था, जो 1926 में हुई वास्तुकार की मृत्यु की शताब्दी की स्मृति में मनाया जा रहा है। वास्तुकार और आंतोनी गाउदी धन्य-घोषणा संघ के अध्यक्ष होसे मानुएल अल्मुसारा ने यह व्याख्यान El Círcol de Reus में दिया, जो रिउदोम्स के बहुत निकट है, जहाँ गाउदी का बचपन बीता। पत्रकार शावियर पेते ने Agència Flama के लिए इसकी रिपोर्ट लिखी, जिसे एजेंसी ने 20 जनवरी 2026 को «Gaudí no copiava la natura: n'extreia les lleis» (गाउदी प्रकृति की नकल नहीं करते थे: वे उसके नियम निकालते थे) शीर्षक से प्रकाशित किया। रिपोर्ट व्याख्यान की विषय-वस्तु पर केंद्रित है: गाउदी ने प्राकृतिक जगत को देखना कैसे सीखा और जो देखा उसका क्या किया।
अल्मुसारा ने प्रकृति को गाउदी की महान शिक्षिका के रूप में प्रस्तुत किया। रिपोर्ट के अनुसार वास्तुकार की अवलोकन-क्षमता उनके बचपन में रिउदोम्स स्थित परिवार के फ़ार्महाउस Mas de la Calderera में जन्मी। वह बालक जल्दी ही अपने आसपास की चीज़ों को ध्यान से देखना सीख गया, और यह आदत वास्तुकार के रूप में उनके काम में भी साथ रही। वक्ता के अनुसार यहीं उस कृतित्व की जड़ है, जिसका आज प्रकृति से प्रेरित वास्तुकला के उदाहरण के रूप में अध्ययन किया जाता है। रिउदोम्स के खेतों में गाउदी ने जो सीखा, उसे बाद में उन्होंने बार्सिलोना में बड़े पैमाने पर लागू किया।
व्याख्यान का केंद्रीय विचार वही है जिसे Flama ने शीर्षक के लिए चुना। अल्मुसारा के अनुसार गाउदी प्रकृति की नकल नहीं करते थे: वे उन नियमों को खोजते थे जो प्रकृति को व्यवस्थित करते हैं, और उन्हें अपनी वास्तुकला में उतारते थे। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि नकल करने वाला केवल बाहरी रूप दोहराता है, जबकि नियम खोजने वाला उसे नई समस्याओं पर लागू कर सकता है। वक्ता ने इसे एक ऐसे विचार से समेटा जो गाउदी के पूरे कृतित्व में दिखाई देता है: «सच्ची मौलिकता मूल की ओर लौटने में है।» इस अर्थ में मूल की ओर लौटने का अर्थ है रूपांकन से पहले प्रकृति के पास जाना और उससे सीखना। अल्मुसारा ने इस विचार को गाउदी की इमारतों को समझने की कुंजी के रूप में सामने रखा।
व्याख्यान में धन्य-घोषणा प्रक्रिया पर भी बात हुई, जिसे अल्मुसारा 1992 से आगे बढ़ा रहे हैं। Flama के अनुसार उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया रिउदोम्स में शुरू हुई थी और लगभग तीन वर्ष पहले बार्सिलोना महाधर्मप्रांत के पास चली गई। गाउदी अप्रैल 2025 से वंदनीय हैं, और धन्य घोषित होने के लिए उनकी मध्यस्थता से हुए किसी चमत्कार की मान्यता आवश्यक है। अल्मुसारा ने आशा व्यक्त की कि यह प्रक्रिया धन्य-घोषणा तक पहुँचेगी, और गाउदी के चिंतन पर अपनी एक पुस्तक की घोषणा की। उन्होंने एक निजी वाक्य भी कहा, जिसे रिपोर्ट कातालान में उद्धृत करती है: «Sense Gaudí no soc res ni ningú» (गाउदी के बिना मैं न कुछ हूँ, न कोई)। ये उस व्यक्ति के शब्द हैं जो तीस वर्षों से अधिक समय से गाउदी को लोगों तक पहुँचाने में लगे हैं।
